उत्पन्ना एकादशी

  • ग्यारस की पौराणिक कहानी

ग्यारस की पौराणिक कहानी

(Ekadashi Vrat Katha / Story in Hindi)

बहुत समय पहले त्रेतायुग में एक दैत्य था — मुर नामक राक्षस। वह अत्यंत शक्तिशाली था और देवताओं को कष्ट देता था। देवताओं ने भगवान विष्णु से रक्षा की विनती की।

भगवान विष्णु ने मुर दैत्य से युद्ध किया, लेकिन वह बहुत चतुर और मायावी था। युद्ध कई दिनों तक चलता रहा। भगवान विष्णु को क्षणभर विश्राम की आवश्यकता हुई, इसलिए वे एक गुफा में जाकर विश्राम करने लगे।

जब मुर दैत्य वहाँ पहुंचा और उसने सोते हुए भगवान विष्णु पर हमला करने का प्रयास किया, तभी अचानक भगवान के शरीर से एक दिव्य शक्ति उत्पन्न हुई। वह अत्यंत तेजस्वी रूप में एक सुंदर, तेजवान कन्या थी।

उस कन्या ने मुर दैत्य को तुरंत ही युद्ध करके मार गिराया।
भगवान विष्णु जागे और उस दिव्य कन्या के पराक्रम को देखकर प्रसन्न हुए।

उन्होंने कहा—
“तुम मेरे द्वारा प्रकट हुई हो, इसलिए आज से तुम संसार को पवित्र करोगी। तुम्हारा नाम ‘एकादशी’ होगा। जो भी मनुष्य तुम्हारा व्रत रखेगा, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – चारों फल प्राप्त होंगे।”

तभी से हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारस (एकादशी) भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है।
ग्यारस के व्रत और पूजा से—

  • पाप दूर होते हैं
  • मन की शुद्धि होती है
  • घर में शांति और समृद्धि आती है
  • मनोकामनाएँ पूरी होती हैं

ग्यारस व्रत का महत्व

  • यह व्रत सर्वश्रेष्ठ व्रतों में गिना जाता है।
  • इसे रखने से व्यक्ति को विशेष पुण्य मिलता है।
  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।